Sunday, October 10, 2010

खुदा भी था वहीँ जहाँ राम समाया था,


संजय भाई और किशोर भाई कई दिनों से ढाणी बाजार पर पोस्ट लगाने को कह रहे थे...अब जब अपना प्रमुख  ब्लॉग ब्लॉगर महाशय ने अटका रखा है..तो सोचा ढाणी बाजार  का सहारा लिया जाए...आपसे राय भी चाहता  हूँ कि नया ब्लॉग ही बनाया जाए तो कैसा रहेगा...इस पर तो फोलोवर्स ने आना ही छोड़ दिया है...अयोध्या पर दिली विचार जो मैंने अपनी पोस्ट पर भी लगा रखे है ढाणी बाजार पर आपको पुन: प्रस्तुत कर रहा हूँ...

उसने अपना दिल चीर के दिखाया था.
खुदा भी था वहीँ जहाँ राम समाया था,

नफरत के दरिया में दोनों बहने लगे थे 
सियासत ने इस कदर जुल्म ढहाया था.

बड़ी ही हिकारत से देखा था हरबार उसको 
जख्मो पे जिसने मरहम आज लगाया था

देख उसको जो कह रहा है सब तुझे दूंगा 
खंजर से कल जिसका तूने खून बहाया था  

सियासत कांप रही थी,तख़्त हिलने लगे थे 
माजरा कुछ नहीं, बस साथी हाथ बढाया था