Thursday, April 29, 2010

राजस्थान- गर्मी, पानी और बदलाव

( प्रस्तुत आलेख किंचित परिवर्तनों के साथ अप्रैल २०१० को नवभारत टाइम्स के मुंबई संस्करण में प्रकाशित हुआ थामित्रों और आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ। )

मारवाड़ पूरो तप रियो है.लाय लागणी सरू व्हेगी है. लूआं'ज बाकी रई है. ओ कसर भी आवण वाला टैम में पूरी हो जावैला.खैर औ तो कुदरत रो नेम है. कैवे है कै मार गर्मी पड़े तो जमानो भी ठीक आवै. लारलो साल जमानो ठीक नी रियो.मिनखां तो कइं ढोरां रे वास्ते इ चारे जोगो मे नी पड़ीयो. क्यूंकि आदमी तो कीकर इ आपरो काम चला ले. अबै देखो .. इण साल इन्दर देव कइं धार ने राखियो है.अठै जोधपुर में हाल तो पाणी बराबर आ रियो है पर दूजी कई जगावां में जठै नैर रो पाणी नी पूगियो है वठै चार चार पांच पांच दिन सूं पाणी देवे. पैली अठैरा लोग कुआँ- तलाबां रो पाणी काम में लेवता, राज री घणी गरज नी करनी पड़ती. अबै ओ हाल है कै सैर में जित्ता भी तलाब हा, हाल भी है, सब रा सब कचरै सूं भरीज ग्या है. ऊपर सूं मूर्तियाँ रो विसर्जन भी इणीज तलाबां में होवे.मानखै रै पीवण लायक पाणी कठेइ रयो कोनी. जिको राज रै नळां में पाणी मिलै विरै माथै काम चाल रयो है.विण सूं मिनख रो काम तो चाल जावै, गायां ने पाणी कीकर मिल सकै?ऊंठा रा बरग कठै जावैला ? ओ सवाल उठावण रो ओइज टाइम है पर सवाल ओ भी है कै इण सवालां ने ले'र सरकार कनै कुण जावैला? अर सरकार इत्ता साल कई कर लियो?

सरकार बाड़मेर में तेल साफ़ करण रो कारखानो लगावण री बात करै. तेल रा कुआ खोदण वाळी कंपनी कैवे अठै निरोए तेल है.ओ तेल सरकार ने कमा'न देवेला. लोगां ने रोजगार मिलेला. सोचण री बात है कै लोग तेल ने पी तो सकै कोनी. पीवण ने तो पाणी'ज चईजी.उठै म्हारा जाणकार बतावै के पाणी री सप्लाई चार चार दिनां में एक बार होवै.खबर आई है के बाड़मेर रै वास्ते नैर री पेयजल योजना ने मंजूरी मिळगी है. पकिस्तान सूं सींव लागण रै कारण फौजियाँ ने ध्यान में राख'र भी आ फैसलों लिरीज्यो होवैला. पैली रेल लैण चौड़ी करण में भी सीमावर्ती जिल्लो होवण री बात ध्यान में रई होवैला.कद कद सोचूं कै जे बाड़मेर सीमा माथे नी होव्तो तो अठै रा लोगां वास्ते इत्तो विकास भी सरकारां करती?

कित्ती गर्मी में भी रात अठै ठंडी रैवै. भर गर्मी में लोग रात री बाट जोवताइज दिन काटै. होली रे पछै आवण वाळी सीतला सप्तमी ने ठंडो खायो. एक दिन पैली अठै रा देसी सूका साग ज्यूं कैट, कूमटा, सांगरी रो पचकूटो बणा'र. अबै सैर में तो आ हाल हो ग्या है के इन्ना बणा बणाया पैकेट सौ सौ रुप्यां में मिलै.सुणियो है के आ सब्जी मोटी मोटी होटलां में अणूती मैंगी मिलै.यूँ भी मारवाड़ रै सैरां में लोग बाग बासोड़ा रै दिन इज इयांने काम में लेवे. अठै रे वास्ते भी ए अबै खास जायको बण ग्यो है.अठै रा टाबर भी विदेसी पांवणा ज्यूं ऊँट सवारी रो कोड करै ! ठेठ देसी निसाणियां सैरां में परदेसियाँ ने बतावण सारु रैगी है. धोती- तेवटो पैर'ने गोरा जरूर सड़कां माथै घूमता दिखै. गांवां री मैं नी कैंऊँ, सैरां में तो बूढा बा'सा ने छोड़'र कोई अठै रै पैरवेस में नी दिखै.

मुख्यमंत्री जी रो घर जोधपुर इज है.राजस्थान रो बजट पेश व्है चुको है. रोजीना री जरूरी चीजां माथे वैट री दर बढा'र एक बार रो तो काळजो ऊँचो चढ़ा दियो हो. दूजे इज दिन दर बढावण री घोसणा पाछी ली जद जीव में सांति आई. विरै पछै विधान सभा में लारला दिनां खूब उठा पटक व्ही. विण टैम निलंबित करीज्योड़ा सचेतक री उपस्थिति देख'र वानै बारै भेजण री कोसिसां में अध्यक्ष जी ने मार्शल बुलाणा पड्या.सुरक्षा कर्मी अर बीजेपी रे कींक सदस्यां रे बिच्‍चै हाथापाई सूं हंगामों जरूर खड़ो व्है ग्यो. राज्यां री विधान सभावां में मार्शलां ने तर तर बत्तो हस्तक्षेप करणों पड़ रयो है.राज रै काम काज में ठीमरपणो दी'खी आ उम्मीद कीकर कर सकां? बात साची है कै नी? कईं भाया थूं कईं कैवे ?

बात पाछी गर्मी री करूँ. अबार तो जगै जगै कोरी मटकियाँ बिकण खातर आयोड़ी पड़ी दीखै. लोगां री तिरस मटकियाँ ब्राउज़ करती फिरै.पुराणा लोग तो अबार भी मटकियाँ नै ठोला सूं बजा'र परखै.पर घणखरा तो कुम्भार ने'इज ढंग री मटकी देवण रो जिम्मो पकड़ाय देवे.कित्ताय फ्रीज भले आय ग्या है,घर रै एक खुणे में मटकी हाल ताइं लाध जावै. मोकलसर अर पचपदरा री मटकियाँ में जद ताईं पाणी ठरैला ऐड़ा केई ऊनाळा यूँइज निकळ जावेला. बाकी राज रा काम ज्यूँ चाल रया है व्यूं'ज चालैला. एक प्राइवेट बस रै लारे लिख्योड़ो याद आवै-
" औ है राजस्थान री लैला,आ तो यूँइज हालैला "