Saturday, February 13, 2010

प्रेम दिवस की पूर्व संध्या पर आईये एक अश्लील फिल्म देखें

१४ फरवरी, दुनिया का इस दिवस के प्रति सहज आकर्षण बना रहता है. ये खास दिन प्रेम के इजहार में अपनी अश्वशक्ति लगा दिया करता है. हमारे लिए भी इस दिन का महत्त्व है कि कई सेनाएं सक्रिय हो पाती है और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य कर पाती है. उनको भी शुभकामनाएं कल के लिए. मुझे कविता का कोई तजुर्बा नहीं है किन्तु हिंदी साहित्य का विद्यार्थी रहा हूँ तो कक्षा में की गयी पढाई में से थोड़ी सी अभी स्मृति में बाकी है कि कविता को कैसे समझा जाये. वैसे कविता को समझने के लिए हिंदी साहित्य का विद्यार्थी ही होना चाहिए ऐसी किसी प्रकार की शर्त नहीं है. फिर भी इस कविता को मैंने एक जिज्ञासु पाठक की तरह आप के सामने रखने का फैसला किया है. फिलहाल कविता पढ़िए कवि है श्री अशोक वाजपेयी.

विपरीत रति

आकाश नीचे लेटा होगा
अपने नक्षत्रों, आकाशगंगाओं में जगमगाता,
पृथ्वी होगी ऊपर
उसके उत्तुंग शिखर
उसकी सघन उपत्यकाएं.

झरना फूटेगा
नीचे से ऊपर की ओर
नदी बहेगी पृथ्वी से आकाश की ओर...

दोनों श्लथ होंगे

फिर विभोर होकर
बारी बारी से
मदनारूढ़.

रति की मन में अनेक संभावनाएं हैं.