Sunday, August 2, 2009

ईश्वर की ऊब,ऑल वैदर कोट में देवता और बकरी का वैकल्पिक मोक्ष पाठ

कुछेक बार पहले भी यहाँ चुका था पर इस बार यहाँ आकर लगा भगवान् भी ऊब महसूस कर सकते है शिवजी इन पहाडियों में पिछले हज़ार सालों से समाधिस्थ हैं पर उनका ये धाम भक्तों की आहट के गिने चुने स्वर ही सुन पाता है धर्म की बंसी के साथ पर्यटन के तबले की संगत भी ज़रूरी है इस रेगिस्तानी जगह की भट्टी में तपती पहाडियों के बीच कपालेश्वर का मन्दिर देखने शिव-परिवार का कोई सदस्य भी आना चाहे तो उसे गूगल सर्च में ये जगह मिलनी नहीं है और फ़िर कैलास की ठंडक के आदी भगवान् के यहाँ चिमटा रोपने के तर्क को ढूँढने में उसे और वक्त जाया करना पड़ेगा

अपना जाना इस बार एक शादी में पश्चिमी सीमा के पास के एक गाँव चौहटन (बाड़मेर) जाने से सम्भव हुआ जून की गरमी असहनीय थी लग रहा था बस भाग लिया जाय,कहीं भी संयोग से साथ आए बन्धु लोग भी इसी गर्मी से पगलाए हुए थे तो प्रोग्राम इस तरह बना कपालेश्वर का, जो गाँव की पहाडियों में गाँव बनने से पहले ही मौजूद था रास्ता ज़्यादा दूर नहीं था और गाँव ज्यादा बड़ा नहीं था जल्द ही पहाडी पर चढ़ने लग गए रास्ता कोई मुश्किल नहीं था,ऊपर से गाँव वालों ने काफ़ी रास्ता अपने और कभी भूले भटके बाहर से आने वालों के लिए पक्का बनवा रखा था

गर्मी से छुटकारा कहीं नही था पर यहाँ शान्ति थी जो गर्मी को सहनीय बना रही थी वरना गर्मी में चिल्ल पों जानलेवा लगती है एक गाँव के ही सज्जन साथ में थे उन्होंने जो जानकारी दी उसके मुताबिक पांडव यहाँ भी चुके थे अगर पांडवों के बारे में जनश्रुतियों को इकठ्ठा करे और उसके आधार पर उनके अज्ञातवास का नक्शा खींचे तो हिन्दुस्तान के हर गाँव में पांडवों का राशन कार्ड बन सकता है
कपालेश्वर मन्दिर पुराना है जो इसके शिल्प से ज़ाहिर होता है हालांकि उत्साही भक्तों ने कई देवताओं पर पेंट का ऑल -वैदर कोट करवा रखा है टूटे मन्दिर के अवशेषों को इकठ्ठा करके थोड़ा नीचे नया मन्दिर बना दिया गया है मन्दिर के नीचे पहाडियों से झरते बरसाती पानी का' गुल्लक'- एक कुआँ हैं जिसका पानी कभी ख़त्म नही होता (यहाँ खपत भी ज्यादा नहीं है:)

मन्दिर के बारे में "राजस्थान के अभिलेख" पुस्तक में गोविन्द श्रीमाली ने यहाँ एक शिलालेख में लकुलीश सम्प्रदाय के गुरु शिष्यों के उल्लेख के बारे में लिखा है

पहाडियों पर बकरियां शिवजी की ऊब से बेखबर उनके समय से ही हरे पत्तों को चबाये जा रहीं हैं और मोक्ष का वैकल्पिक पाठ उपलब्ध करवा रहीं हैं